श्रापित किला और गुज्जर


Tughlaqabad fort

‘‘या बसे गुज्जर या रहे उजर’’


दोस्तों इतिहास के पन्नों में जब हम गुर्जर समाज का अस्तित्व खंगाल रहे थे तो एक श्रापित किलें से गुर्जरों के सम्बन्ध का दिलचस्प किस्सा सामने आया। इस लेख में हम आपको एक ऐसे श्राप के बारे में बता रहे है जो आज भी तुगलकाबाद के किलें में गूंजता है।

कहानी शूरू होती है तुगलक वंश के संस्थापक से, जो इतिहास में ग्यासुद्धीन तुगलक या गाजी मलिक के नाम से जाना जाता है। यह खिलजी वंश के महान शासक अलाउद्धीन खिलजी के अधीन पंजाब के दीपालपुर का गर्वनर था। सन् 1316 में जब अलाउद्धीन खिलजी की मृत्यु हुई और उसके पुत्र शासन स्थापित करने में असमर्थ साबित हुए और राज्य का शासन षडयंत्रकारी लोगों के हाथों में जाने लगा तो गाजी मलिक तख्तपलट करके सुल्तान बन गया और तुगलक वंश की स्थापना कर तुगलकाबाद शहर बसाया।

अपने सपनों के किलें को लेकर वह इतना उत्साहित था कि सुल्तान बनते ही सख्त आदेश जारी कर दिये कि दिल्ली के सभी श्रमिकों को अपने सभी काम छोड़कर इस किले पर काम करना होगा। इसी समय सूफी संत निजामुद्धीन औलिया ने भी दरगाह के पास एक बावड़ी खुदवाना प्रारम्भ किया। श्रमिकों की निजामुद्धीन औलिया के प्रति बड़ी आस्था थी इस कारण मजदूर दिन में किले में काम करते और रात को बावड़ी पर।

ग्यासुद्धीन चाहता था कि सभी मजदूर अपना ध्यान सिर्फ किले के निर्माण पर लगाये इसलिए उसनेे मिट्टी का तेल बेचने पर पाबंदी लगा दी ताकि उस बावड़ी पर रात्रि में किसी तरह का कोई निर्माण कार्य न हो सके। संत इस बात से क्रोधित हो गये, उन्होंने जादू से पानी को तेल में बदल दिया और तुगलकाबाद को श्राप दिया कि ‘‘या बसे गुज्जर या रहे उजर’’। इस श्राप के बाद यह माना जाता है कि यह साम्राज्य फिर कभी समृद्ध नही हो सका। एक सदृढ़ और सुरक्षित किला जो दो वर्षों में बनकर तैयार हुआ था अब तक भी पूरी तरह से आबाद नहीं हो पाया और खण्डहरों में तबदील हो गया है।

इतिहासकारों का मानना है कि ‘‘यहां गुर्जर शब्द का प्रयोग उस समय दिल्ली में निवास करने वाली इसी गुर्जर जाति के लिए हुआ है। जो मुख्यतः किसान और पशुपालक वर्ग था।’’ ये लोग संत औलिया के प्रति श्रद्धा-भाव रखते थे और मुस्लिम आक्रांताओं के घोर विरोधी थे। औलिया का मानना था कि ग्यासुद्धीन जैसे उद्धण्डी शासकों को केवल गुर्जर जाति के लोग ही सबक सिखा सकते है। इसीलिए संत औलिया ने कहा था कि
‘‘या तो यहां गुर्जर जाति के लोग बसे या यह किला उजाड ही रहे।’’

यह किला दिल्ली के उस क्षेत्र में ही बसा है जहां आज भी बड़ी संख्या में गुर्जर आबादी निवास करती है। और माना जाता है कि उसी संत के आशीर्वाद से ये लोग अन्य समुदाय की तुलना में यहां घनी आबादी में बसे है और सभी तरह से सम्पन्न है।

नीचे दिये गये सन्दर्भ/रेफरेंस के लिंक पर क्लिक करके आप इतिहास की किताबों में दर्ज इस कहानी के बारें में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते है।
श्रापित किला और गुज्जर
Video credit:- Live History India
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References:- Social Sci. (History) 7       Reading in Indian History         India: A History         India Condensed: 5,000 Years of History & Culture

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