फैयाज-उल-हसन चौहान


फैयाज-उल-हसन चौहान
दोस्तों आज हम आपको बता रहे है पाकिस्तान के जाने माने गुर्जर राजनेता फैयाज-उल-हसन चौहान के बारें में। इनका जन्म 21 मई 1970 में लाहौर में चौहान गोत्र के एक गुर्जर परिवार में हुआ था। इन्होनें 1994 में पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री प्राप्त की ।
ये सन् 2002 से पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त की राजनीति में कार्यरत है। इन्होने 2018 में पाकिस्तान आम चुनाव में रावलपिंडी से पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के उम्मीदवार के रूप में पंजाब की प्रान्तीय विधानसभा से चुना लडा और जीते भी।
फैयाज-उल-हसन चौहान राजनीती में अपने जोशीले और आक्रामक रवैये के कारण जाने जाते है ये टीवी टॉक शो में खुल कर अपने विरोधियों का विरोध करते हुए नजर आते है। वो अपने इस स्वभाव का कारण उनका ‘गुर्जर’होना बताते है। एक टीवी शो में जब उनसे पूछा गया कि -
‘‘हम प्रोगा्रमों में देखते है कि इतना गुस्सीला, जोशीला, लड़ जाने वाला,मर जाने वाला ये तबीयतन है या एक फसाद है जो लोगो के लिए क्रिएट किया हुआ है।’’
तो वो इसका जवाब कुछ इस तरह देते है कि
‘‘इसकी बुनीयादी वजह ये है कि मैं गुर्जर हूं और फ्रन्ट फुट पे खेलने वाला हूं बैक फुट पर मैं नही खेल सकता। और ये मेरा मिजाज मेरी वालदा से है और वो बहुत डेडी किस्म की गुर्जरी थी।’’
कई बार उन्होंने मिडियाकर्मीयों से अभद्र व्यवहार के कारण अपनी गलत छवि प्रस्तुत की। मिडिया द्वारा ‘अशिष्ट राजनितिज्ञ’के रूप में इनकी आलोचना की गई है।
ये 2018 में ‘फिल्मों के अश्लील पोस्टरों’’ पर दिये गए बयान को लेकर सुर्खियों में आये थे। एक पाकिस्तानी वेबसाइट https://www.dawn.com/ के अनुसार उन्होनें कहा था कि
‘‘यदि कोई अश्लील पोस्टर पंजाब के किसी सिनेमा घर के अंदर या बाहर लगाया जायेगा तो सबसे पहले जुर्माना होगा और अगर वे ये अभ्यास जारी रखते है तो सिनेमा बंद हो जाएगा’’
आगे कहते है कि-
‘‘यानी ये वखरी जवानी है जो सिनेमाघरों में आयी हुई है, क्या यह सभ्य है कि आप एक अर्द्धनग्न महिला की तस्वीरे छापते है और इनके बड़े पोस्टर लगाते है ? लोग इस तरह के मनोरंजन के लिए पोर्न देखते है।’’
2019 में सूचना एवं सांस्कृतिक मंत्री के पद पर रहते हुए ये हिन्दुओं पर अपनी अभद्र टीप्पणीयों के कारण पाकिस्तानी राजनीति में काफी चर्चित हुए थे। इन्होने कहा था-
‘‘कान खोल के सुन लो, गाय का यूरीन पीने वालों, हम मुसलमान है हमारे हाथ में एक झण्डा है मौला अली की बहादुरी का, हजरत उमर की वीरता का, आपके पास वो झण्डा नहीं है। इस भम्र में ना रहे कि आप हमसें सात गुना बेहतर है हमारे पास जो कुछ भी है वो आपके पास नही है, बूतों (मूर्ति) को पूजने वालों ।’’
इस बयान के बाद इन्हे अपने ही देश के अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय के साथ अन्य नेताओं और हस्तियों से भी अपमानित होना पडा था। जिसके बाद इन्होंने माफी मांगी और अपने पद से इस्तीफा भी दिया। 2 दिसंबर 2019 को उन्हें फिर से सूचना और संस्कृति विभाग के प्रांतीय मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया ।
2020 में कोरोना वाइरस के संकम्रण के दौरान भी कुछ असभ्य बयानों से चर्चा में रहे। इन्होने कहा था कि-
‘‘जो कोरोन वाइरस के आने के बाद 1 रूपये की चीज को 100 रूपये तक लेकर जायेगें और ये आइडियोलोजी रखते है कि अपना सबकुछ बनता भाड में जाये जनता, तो उनके विकलांग बच्चे पैदा होते है और यह उनके माता-पिता के लिए अल्लाह की ओर से एक सजा है।’’
मेरी रायः- दोस्तो फैयाज-उल-हसन चौहान भले ही हिन्दु विरोधी, आकाम्रक स्वभाव वाले, स्त्रीयों को अश्लील वस्तु की तरह प्रस्तुत करने वालों के विरोधी, पाकिस्तान के लिए अपनी असीम देशभक्ति दिखाने वाले और हिन्दुस्तान को दुश्मन समझने वाले हो। परन्तु उनके स्वभाव में ये सभी गुण वैसे ही है जैसे एक हिन्दु गुर्जर के स्वभाव में दिखाई देते है जैसे हिन्दुस्तान के लिए देशभक्ति और पाकिस्तान के लिए क्रोध और बदले की भावना।
दूसरा, गलत बात स्वीकार करना इस कौम के स्वभाव में है ही नही। चाहे वो हिन्दु गुर्जर हो या मुस्लिम गुर्जर। गलत का विरोध इनके खून में बसा है। इस लिए आप पायेंगे कि ज्यादातर गुर्जर जो चाहे शरीर से भले ही हळे-कळे ना हो परन्तु स्वभाव से आक्रामक, जोशीले, मिट जाने वाले होते है।
हिन्दु विरोधी होने के लिए मैं ये मान सकता हूं कि शायद उन्हें नहीं पता कि एक बहुत बडी हिन्दु गुर्जर आबादी हिन्दुस्तान में निवास करती है। नही तो एक गुर्जर चाहे कितनी ही दूर का हो दूसरे गुर्जर से मिलने पर दिल खोलकर स्वागत करता है तो उसके धर्म के बारे में गलत कहने का तो वो सोच भी नही सकता है। मैं आशा करता हूं कि शायद जब उन्हें इस हिन्दु गुर्जर आबादी के बारे में पता चलेगा तो वो अपने हिन्दु विरोधी स्वभाव को परिवर्तित कर लेंगे।
फैयाज-उल-हसन चौहान
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